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आयोग का परिचय

प्रदेश में महिलाओं के उत्पीड़न सम्बन्धी शिकायतों के निदान, विकास की प्रकिया में सरकार को सलाह देने तथा उनके सशक्तिकरण हेतु आवश्यक कदम उठाने के उद्देश्य को लेकर 2002 में महिला आयोग का गठन किया गया था। वर्ष 2004 में आयोग के कियाकलापों को कानूनी आधार प्रदान करने के लिए उ0प्र0 राज्य महिला आयोग अधिनियम 2004 अस्तित्व में आया। तत्पश्चात पुन: जून 2007 में अधिनियम में कुछ संशोधन कर आयोग का पुनर्गठन किया गया। पुन: दिनांक 26 अप्रैल 2013 को अधिनियम में आवश्यक संशोधन कर आयोग का पुनर्गठन किया गया।

आयोग का उद्देश्य

  • महिलाओं के कल्याण, सुरक्षा, संरक्षण के अधिकारों की रक्षा करना ।
  • महिलाओं के शैक्षिक, आर्थिक तथा सामाजिक विकास के लिए निरंतर प्रयासरत रहना ।
  • महिलाओं को दिये गये संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों से सम्बद्ध उपचारी उपायों के लिए अनुश्रवण के उपरान्त राज्य सरकार को सुझाव एवं संस्तुतियां प्रेषित करना ।

आयोग की शक्तियाँ

  • आयोग को किसी वाद का विचारण करने के लिए सिविल न्यायालय को प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करने का अधिकार जैसे :-
  • सम्मन करना ।
  • दस्तावेज मंगाना ।
  • लोक अभिलेख प्राप्त करना ।
  • साक्ष्यों और अभिलेखों के परीक्षण के लिए कमीशन जारी करना आदि ।

कार्यक्षेत्र

  • महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा ।
  • महिलाओं का सशक्तिकरण ।
  • महिला उत्पीडन सम्बंधी शिकायतों पर प्रभावी कार्यवाही करना ।
  • बाल विवाह, दहेज एवं भ्रूण हत्या रोकना ।
  • कार्य स्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीडन पर रोक ।
  • महिलाओं से सम्बंधित कानून में आवश्यकतानुसार संशोधन हेतु शासन को संस्तुतियां करना ।
  • महिलाओं से सम्बंधित योजनाओं का प्रभावी रूप से क्रियान्वयन करना ।
  • महिला कारागारों, चिकित्सालयों, छात्रावासों, संरक्षण गृहों तथा अन्य सदृश्य गृहों का निरीक्षण ।

Imp. Website

Suggestion/सुझाव

  • To stop the harrasement of the women of Uttar Pradesh and to provide them instant justice, please send your suggestions at up[dot]mahilaayog[at]yahoo[dot]com

    प्रदेश की महिलाओ के उत्पीड़न की घटनाओ की रोकथाम एवं उन्हे त्वरित न्याय दिलाए जाने हेतु कृपया up[dot]mahilaayog[at]yahoo[dot]com पर सुझाव भेजे

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