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प्रक्रिया :-
1- प्रार्थना पत्र आयोग को सम्बोधित होना चाहिये।
2- प्रार्थना पत्र तीन प्रतियों में कार्यालय में प्राप्त किये जायेंगे।
3- प्रार्थना पत्र पर किसी प्रकार की कोई फीस स्टैम्प पेपर की आवश्यकता नहीं है।
4- प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई केवल सम्ब-िन्धत पक्षकारों से की जायेगी विशेष परिस्थितियों में पीठासीन अधिकारी के आदेशानुसार पक्षकारों के पारिवारिक सदस्यों को सुनवाई में सम्मिलित होने की अनुमति प्रदान की जा सकती है।
5- सुनवाई में अधिवक्ता की उपस्थिति मान्य नहीं है।
6- प्रार्थना पत्र महिला स्वयं उपस्थित होकर, पंजीकृत डाक, स्पीड पोस्ट, फैक्स, अथवा ई-मेल द्वारा दिया जा सकता है।
7- प्रार्थना पत्र पर आवेदक/आवेदिका के हस्ताक्षर या अगूंठा निशानी मूलरूप में होना चाहिये।
क्षेत्राधिकार :-
1- प्रकरण महिला उत्पीड़न से सम्बंधित होना चाहिये।
2- आयोग में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में अंकित उत्पीड़न के तथ्य से सम्बंधित प्रकरण माननीय न्यायालय/किसी अन्य आयोग में लम्बित नहीं होना चाहिये।
3- प्रकरण सेवा से सम्बंधित नहीं होना चाहिये।
4- प्रकरण चल व अचल सम्पत्ति/बंटवारा/वसीयत आदि से सम्बंधित नहीं होना चाहिये।
5- प्रकरण किरायेदारी से सम्बंधित नहीं होना चाहिये।
6- प्रकरण परमिट/लाइसेंस/एसोसिएशन/व्यापारिक सौदे इत्यादि से सम्बंधित नहीं होना चाहिए।
7- बिन्दु 2 से 6 तक के प्रकरणों पर आयोग द्वारा कार्यवाही नहीं की जायेगी परन्तु आवश्यकतानुसार उन्हें सम्बंधित अधिकारी को भेजा जा सकता है, तद्नुसार आवेदिका को सूचित करते हुए उपरोक्त प्रकरण आयोग से निक्षेपित किया जायेगा।
8- प्रकरण प्रार्थना पत्र देने की तिथि से पांच वर्ष से पुराना नहीं होना चाहिये।

Imp. Website

Suggestion/सुझाव

  • To stop the harrasement of the women of Uttar Pradesh and to provide them instant justice, please send your suggestions at up[dot]mahilaayog[at]yahoo[dot]com

    प्रदेश की महिलाओ के उत्पीड़न की घटनाओ की रोकथाम एवं उन्हे त्वरित न्याय दिलाए जाने हेतु कृपया up[dot]mahilaayog[at]yahoo[dot]com पर सुझाव भेजे

    (Please send your complaint with full Address)